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मध्यप्रदेश में एक दिन में लगेंगे 6 करोड़ से अधिक पेड़

नर्मदा सेवा यात्रा पृथ्वी को बचाने का सबसे बड़ा अभियान
नर्मदा सेवा मिशन की कार्यशाला में मुख्यमंत्री श्री चौहान
 

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में 2 जुलाई को एक दिन में 6 करोड़ 67 लाख पेड़ लगाये जायेंगे। यह एक दिन में किसी नदी के तट पर लगाये गये वृक्षों की दुनिया में सबसे बड़ी संख्या होगी। नर्मदा सेवा यात्रा आने वाले समय में पृथ्वी को बचाने का सबसे बड़ा अभियान है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ एप्को भवन में नर्मदा सेवा मिशन कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह भी उपस्थित थे।

मुख्ममंत्री श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा के माध्यम से नदी संरक्षण का अदभुत और अभूतपूर्व काम प्रदेश में किया गया है। इसके अध्ययन के लिये दूसरे प्रदेशों से दल आ रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस अभियान की सराहना की है। अभियान की कार्य-योजना को क्रियान्वित करने के लिये दो जुलाई को पेड़ लगाये जायेंगे। इस अभियान को जन-अभियान बनाकर इसमें अधिक से अधिक आमजनों को जोड़ें। प्रदेश के हर नागरिक के मन में पेड़ लगाने की भावना जगायें। प्रदेश की अन्य नदियों पर भी इस तरह का अभियान चलाया जायेगा। आगामी पाँच जून से बीस जून तक पेड़ लगाओ यात्राएँ निकाली जायेंगी। यात्राओं के माध्यम से नर्मदा तटों पर पेड़ लगाने के लिये जन-जागरण किया जायेगा। राज्य शासन के मंत्री भी इन यात्राओं में शामिल होंगे। समाजसेवी, संत, पर्यावरणविद और विभिन्न सामाजिक,धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों को भी इस यात्रा में शामिल किया जायेगा। नर्मदा तटों के हर जिलों में पेड़ लगाने के लिये अधिक से अधिक लोगों का पंजीयन किया जाये। नर्मदा सेवा समितियों की बैठक सभी जिलों में की जाये। पेड़ लगाने की विस्तृत और अग्रिम योजना बनायें। पेड़ों की देखभाल के लिये पौध रक्षकों को तैयार करें। नर्मदा तटों पर एक किलोमीटर तक पेड़ लगाने को पहली प्राथमिकता दी जाये। इसके बाद दो किलोमीटर और तीन किलोमीटर तक पेड़ लगाये जायें।

हर जिले में पेड़ लगाने के लिये एक लाख से ज्यादा लोगों का पंजीयन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा के तटों पर पेड़ लगाने वाले सभी 24 जिलों में से हर एक में कम से कम एक लाख लोगों का पेड़ लगाने के लिये पंजीयन करवाया जाये। लगाये जाने वाले पौधों की ऊँचाई दो फीट से कम नहीं हो। सभी जिलों में पेड़ लगाने का वातावरण बनाने के लिये पेड़ लगाओ यात्राएँ निकाली जाये। यात्रा के दौरान पेड़ लगाने के लिये अधिक से अधिक लोगों से संकल्प पत्र भरवायें। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी पेड़ लगाने के लिये संकल्प पत्र भरेंगे। बड़वानी जिले की तरह स्कूली बच्चों को पेड़ लगाने के अभियान से जोड़ने के लिये ग्रीन पासपोर्ट दे सकते हैं। इंदौर जैसे बड़े शहरों की स्वयंसेवी संस्थाओं और लोगों को अभियान से जोड़ा जाये।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य शासन ने क्रांतिकारी फैसला लिया है कि नर्मदा नदी में रेत का उत्खनन नहीं होगा। नर्मदा की जैव विविधता और जल-प्रवाह को सुरक्षित रखते हुए वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन की सलाह देने के लिये एक समिति गठित की गई है। रेत उत्खनन का कार्य युवाओं और मजदूरों के स्व-सहायता समूहों से करवाया जायेगा। रेत के विक्रय में राज्य सरकार का हस्तक्षेप रहेगा। इससे मिलने वाली राशि से रेत खनन में लगे मजदूरों को बोनस दिया जायेगा। इस तरह उनके लिये रोजगार के अवसर बढ़ाये जायेंगे।

कार्यशाला में उपस्थित कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों की कार्य-योजना और तैयारियों के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया। वृक्षारोपण का लक्ष्य, पौधों की उपलब्धता और लगाने की तैयारियों की जानकारी दी गई। कार्यशाला में नर्मदा सेवा यात्रा से जुड़े निगम-मंडलों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास श्री आर.एस. जुलानिया, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अनिमेष शुक्ला, संबंधित जिलों के जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, वनमंडलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।

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