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कोर्ट में हाजिर होने से बच रहा है मंत्री पुत्र अभिषेक भार्गव

सागर। श्रद्धा सबूरी कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड नामक फर्जी चिटफंड कंपनी बनाकर गरीब जनता के करोड़ों रुपये हड़पने के आरोपी वरिष्ठ मंत्री गोपाल भार्गव का पुत्र अभिषेक भार्गव अब कानून से भाग रहा है। विगत दिवस भी इस मामले में वह न्यायालय के समक्ष पेश नहीं हुआ और हाजिरी माफी की अर्जी लगा दी। वहीं दूसरीओर वह इस मामले से बचने के लिए उच्च न्यायालय में कोशिश कर रहा है।
जानकारी के अनुसार स्वयं को सबसे ईमानदार बताने वाले प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास के मंत्री गोपाल भार्गव का आरोपी पुत्र विगत 20 फरवरी को भी कोर्ट में पेश नहीं हुआ है। भार्गव के करीबी बताते हैं कि वह इस संगीन मामले में स्वयं को बचाने के लिए हर संभव जतन कर रहा है। इसी के चलते अभिषेक की ओर से उच्च न्यायालय में अपील की गई है कि उसे इस बहुचर्चित चिटफंड घोटाला मामले में आरोपी से हटाया जाये, लेकिन फिलहाल न्यायालय से उसे कोई राहत नहीं मिल सकी है। इसके विपरीत ऐसा माना जा रहा है कि प्रकरण के दो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी होने तक कोर्ट अभिषेक भार्गव को अनिवार्य रूप से हाजिर रहने के निर्देश दे सकती है। इस संभावना की एक बड़ी वजह यह है कि रायसेन जिला अदालत ने करोड़ों रुपये की इस धोखाधड़ी मामले में पर्याप्त सबूत एवं साक्ष्य के आधार पर स्वविवेक से निर्णय लेकर अभिषेक को आरोपी बनाया है, जबकि इसके पहले तक अपनी सत्ता की रसूख का इस्तेमाल करके अभिषेक भार्गव स्वयं को बचाता रहा है।
गढाकोटा निवासी अभिषेक भार्गव श्रद्धा सबूरी कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड नाम की वित्तीय कंपनी के संचालक मंडल में पचास फीसदी से अधिक की भागीदारी के साथ प्रबंधक की हैसियत से शामिल थे । उनके साथ ही हरियाणा राज्य के सिरसा निवासी पंकज कुमार और हरियाणा के ही दीपक गावा नाम के व्यक्ति भी बतौर पार्टनर कंपनी मे शामिल है ।
रायसेन में बसंत उपाध्याय नाम का व्यक्ति श्रद्धा सबूरी कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड नाम की वित्तीय कंपनी में कर्मचारी की हैसियत से कार्यरत था। वह निवेशकों से धनराशि लेता था और उसे काफी अधिक दर के साथ ब्याज समेत वापस करने की बात करता था। इस तरह उसने अनेक निवेशकों से करोडो रूपए जमा करा लिए। कुछ समय पहले यह कार्यालय बंद हो गया तब जनता को कंपनी के फर्जी होने और अपनी मेहनत की कमाई लुटने का अहसास हुआ। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस से की गयी।

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