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स्कूली बच्चे भी देंगे वृक्षारोपण महाभियान में अपना योगदान

कलेक्टर ने निजी व केन्द्रीय विद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक लीजबलपुर: आने वाली दो जुलाई को जिले में आयोजित होने वाले वृक्षारोपण महाभियान में स्कूली छात्र-छात्राएं और उनके शिक्षकगण भी सक्रिय योगदान देंगे। यह निर्णय आज यहां कलेक्टर महेशचन्द्र चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित निजी व केन्द्रीय विद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक में लिया गया। बैठक में पुलिस अधीक्षक एम.एस. सिकरवार भी मौजूद थे।

बैठक को सम्बोधित करते हुए कलेक्टर श्री चौधरी ने कहा कि सभी अशासकीय शिक्षण संस्थाएं और केन्द्रीय विद्यालयों के प्रमुख यह सुनिश्चित करें कि दो जुलाई को आयोजित होने वाले वृक्षारोपण महाभियान में उनकी संस्था की अहम् भागीदारी हो। हम सभी को नर्मदा जी की धारा अविरल बनाए रखने के इस प्रयास में बड़ा योगदान देने के लिए कृतसंकल्पित होना होगा। वृक्षारोपण कार्यक्रम राज्य शासन का अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्यक्रम है जिसमें सभी का सहयोग अपेक्षित है। कलेक्टर ने कहा कि जिले के स्कूलों में पौधारोपण कार्यक्रम एक उत्सव के रूप में आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों के छात्र-छात्राओं को पौधारोपण के महत्व के प्रति जागरूक बनाने के लिए शिक्षण संस्थाओं में निबंध व चित्रकला जैसी प्रतियोगिताओं तथा इस विषय पर केन्द्रित प्रदर्शनी का आयोजन किया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वृक्षारोपण कार्यक्रम केवल नर्मदा जी के अविरल प्रवाह की दृष्टि से ही नहीं वरन समग्र पारिस्थितिकीय संतुलन के लिहाज से भी बेहद अहम् है।

श्री चौधरी ने प्राचार्यों से कहा कि वे यह तय कर लें कि उनकी संस्था के द्वारा कितने पौधे कहां लगाए जाएंगे और वे किस प्रजाति के होंगे। शाला परिसर में उपलब्ध क्षेत्र के अनुपात में पौधों की संख्या तय की जाए। लगाए जाने वाले पौधे सुरक्षित रहें इसके लिए कम्पाउण्ड वाल हो या ट्री गार्ड लगाए जाएं। यदि कोई शिक्षण संस्था बड़े पैमाने पर पौधारोपण करना चाहती है तो उसे वांछित भूमि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। श्री चौधरी ने कहा कि शाला परिसरों में पौधारोपण के लिए नर्सरीज से दो वर्ष पुराने पौधे प्राप्त किए जाने चाहिए। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण पौधारोपण की जरूरत बताई तथा यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि लगाए जाने वाले पौधे जीवित रहें। श्री चौधरी ने अपेक्षा की कि शाला प्रमुख इंटरनेट से पौधारोपण सम्बन्धी प्रपत्र प्राप्त करें और उसकी पूर्ति कर जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपें। पौधारोपण सम्बन्धी कार्य-योजना 12 जून तक उपलब्ध करा दी जाए। उन्होंने वेबसाइट पर शिक्षकों व छात्रों का रजिस्ट्रेशन कराए जाने के भी निर्देश दिए। श्री चौधरी ने गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड्स के मानदण्डों के अनुरूप पौधारोपण कार्यक्रम के दस्तावेजीकरण के सम्बन्ध में भी प्राचार्यों को हिदायत दी।

बैठक में पुलिस अधीक्षक एम.एस. सिकरवार ने कहा कि वृक्षारोपण से हमारा कल सुरक्षित रहेगा। वृहद् वृक्षारोपण कार्यक्रम का उद्देश्य बड़े पैमाने पर वृक्ष लगाने के साथ-साथ आम लोगों में जागृति पैदा करना भी है। शिक्षण संस्थाओं में इस सिलसिले में आयोजित होने वाली प्रतियोगिताएं आने वाली पीढ़ी को अपने पर्यावरण की रक्षा के प्रति सजग बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण सिद्ध होंगी। उन्होंने कहा कि वृक्ष हमेशा मनुष्य के लिए एक मददगार की भूमिका में होता है। वह हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन देता है और हमारे द्वारा छोड़ी जाने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण कर लेता है। इतना ही नहीं वृक्ष भीषण गर्मी में हमें शीतल छांव और मीठे फल भी उपलब्ध कराता है। पुलिस अधीक्षक ने वृक्षों के महत्व के प्रति बच्चों को जागरूक बनाने और उन्हें पौधे लगाने के लिए प्रेरित करने को बेहद अहम् बताया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पौधारोपण के लिए बहुत अच्छा माहौल बनेगा वरन् हमारा कल भी सुरक्षित होगा।

जिला परियोजना समन्वयक डॉ. आर.पी. चतुर्वेदी ने बैठक में बड़ी संख्या में मौजूद प्राचार्यों से उनके शाला परिसर में पौधारोपण के लिए उपलब्ध स्थान तथा अन्य सम्बन्धित पहलुओं के बारे में विस्तृत चर्चा की तथा प्रत्येक निजी स्कूल और केन्द्रीय विद्यालय के लिए लक्ष्य तय किए। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी एन.के. चौकसे भी मौजूद थे।

बैठक के समापन पर कलेक्टर श्री चौधरी ने सभी को दो जुलाई के वृक्षारोपण महाभियान में पूरे मन से सम्मिलित होने और सक्रिय भागीदारी करने की शपथ दिलाई।

बैठक में बड़ी संख्या में अशासकीय शिक्षण संस्थाओं तथा केन्द्रीय विद्यालयों के प्राचार्य मौजूद थे।

 

शैलेष दुबेडायरेक्टर

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