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‘सक्षम किसान-समृद्ध भारत’

  • “सक्षम किसान – समृद्ध भारत”

कृषि आय को बढ़ाना व किसान को समृद्धशाली बनाना ही एकमात्र लक्ष्य

भारत ऋृषि, गाँव एवं कृषि प्रधान देश है। ऋृषि प्रणीत चिन्तन व जीवन शैली तथा गाँव व कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था, हमारी सुख-शांति व समृद्धि का आधार रहे हैं। कृषि से ही भारत की संस्कृति और समाज का सरोकार रहा है। ‘‘प्रभु इतना धन दीजिये जा में कुटुम्ब समाय, मैं भी भूखा न रहूँ और कोई साधु न भूखा जाय’’ उपरोक्त वाक्य में भारत की अवधारणा ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ की भावना प्रदर्शित होती है । परंतु विगत वर्षो से भोगवादी चिंतन व जीवन शैली की अंधी दौड़ ने हमारा सुख-चैन छीना तथा प्रकृति व अर्थव्यवस्था के मूल ढाँचे को छिन्न -भिन्न कर के रख दिया है । अब इस ढाँचे की पुर्नस्थापना से ही पीड़ित मानवता व प्रकृति को राहत मिल पायेगी।

आज भौतिक विज्ञान के प्रभाव ने खेती की प्राथमिकता दोयम दर्जे की कर दी है । खेती हाशिए पर चली गइ्र है। रही-सही कसर खेती की बढ़ती लागत ने पूरी कर दी। रासायनिक खाद से उत्पादकता वृद्धि की चाहत ने जहाँ खेती को मँहगा बना दिया है, वहीं उत्पादकता वृद्धि के लालच में रासायनिक खाद ने भू माता को बंजर बना दिया है। माँ की सेहत पीली पड़ जाती है, तो उसका असर संतति पर पड़ता ही है। केन्द्र में सरकारें आइंर्, किसानों की समस्याएँ सियासी मुद्दा बन गई और चुनाव आते ही फौरी राहत देकर सियासी दलों ने किसानों को वोट बैंक बना दिया। और चुनाव जीतने के बाद किसानों को जस का तस छोड़ दिया जाता है। नतीजा सामने है 45 प्रतिशत किसान वैकल्पिक व्यवसाय मिलने की दशा में किसानी से तौबा करने को तैयार है। खेती से पलायन उसकी नियति बन चुकी है। कभी मौसम की मार, कभी खाद की कमी तो कभी बाजार में भाव की कमी समस्याओं का तो किसान के साथ चोली-दामन का साथ है। किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहा है लागत बढ़ती जा रही है । आमदनी कम होती जा रही है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व नरेन्द्र मोदी जी ने किसानों के लिए सन् 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।


इस समय जहाँ देश में खेती की विकास दर कहीं शून्य तो कहीं 0.5 : है, किसान की आय दोगुना करने का लक्ष्य असंभव लगता है। क्योंकि इसके लिए खेती की विकास दर न्यूनतम 10 : पहुँचाना और किसानों को समर्थन मूल्य में पर्याप्त वृद्धि करना असंभव है तो आमदनी दोगुनी करना कैसे संभव है। समर्थन मूल्य में भी वृद्धि मात्र 4 : ही अधिकतम हुई है।
केन्द्र सरकार नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जो भी कार्य कर रही है निश्चित रुप से दुनिया आश्चर्यचकित हो जायेगी और अर्द्धसत्य पूर्ण सत्य साबित होगा। इस वर्ष के बजट में सरकार ने देश की अधूरी पड़ी सिंचाई योजनाओं को समय सीमा में पूरी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सरकार ने 86000 करोड़ रुपये का बजट रखा है। काम किस गति से प्रारंभ हुआ है बताने के लिए पर्याप्त है कि अधूरी पड़ी 23 सिंचाई परियोजनाओं पर जिस तेजी से काम शुरु हुआ है, मार्च 2017 तक ये पूरी हो जायेगी । जिससे 80 लाख हे. भूमि पर नई सिंचाई क्षमता बढ़ जायेगी । वर्तमान में 47 : काश्त का रकबा के लिए किसान आसमान में टकटकी लगाए रहते हैं। यह स्थिति भी आगामी समय में बदलने जा रही है।  जिससे सूखा पड़ने पर किसान मायूस नहीं होगा। यही कारण है कि विगत वर्ष सूखा की स्थिति के बावजूद कृषि उत्पादन बढ़ा । वर्तमान भाजपा की केन्द्र सरकार व राज्य सरकार गिरते भू जल स्तर से चिंतित थी उसने मनरेगा को सिंचाई कार्यो से जोड़ा है । 5 लाख खेतों को तालाब बनाकर (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की जा रही है। ) मनरेगा में 38 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है।

कई दशकों से किसान रासायनिक खाद से खेतों में से उपज ले रहे हैं, जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति में असंतुलन पैदा हो गया है, उर्वरा शक्ति क्षीण हो गई है। इसके बावजूद किसान की लागत में दोगुना वृद्धि होने से एवं मौसम प्रतिकूल होने के कारण करेला और नीम चढ़ा वाली स्थिति बन गई है। केन्द्र सरकार राज्यों की सरकार को स्वाइल हेल्थ कार्ड किसानों को उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय मदद दे रही है। आने वाले समय में प्रत्येक काश्तकार अपनी जमीन का हेल्थ कार्ड देखकर ही न्यूनतम रासायनिक खाद का इस्तेमाल कर सकेगा। जिससे भूमि को उचित खुराक मिलेगी और उत्पादन सुनिश्चित होगा।

अब बात यदि समर्थन मूल्य की जाये तो एमएसपी केवल पढ़े-लिखे और संभ्रान्त किसानों के लिए है। कई प्रदेशों को सुदूरवर्ती गांवों में तो आज भी लोग समर्थन मूल्य नहीं समझते । फसल पकते ही किसान बाजार ले आते हैं । पैसों की आवश्यकता के चलते बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पं. बंगाल जैसे राज्योंमें किसान समर्थन मूल्य से ज्यादा सरोकार ही नही रखते क्योंकि उन्हे जागरुक ही नहीं बनाया गया है। म.प्र. जैसे प्रगतिशील राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समर्थन मूल्य पर बोनस देकर और ई-उपार्जन की पद्धति विकसित कर न केवल लोक शिक्षण का कार्य किया है अपितु उत्पादन वृद्धि में किसानों में स्पर्धा का संचार किया है। यही कारण है कि म.प्र. में कृषि उत्पादन का देश-दुनिया में कीर्तिमान बना। चौथी बार म.प्र. को कृषि कर्मण सम्मान हासिल हुआ। मुख्यमंत्री और किसानों की विश्वव्यापी सराहना हुई । म.प्र. किसी भी राज्य में निरंतर वृद्धि का मिसाल बना । ऐसे में पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी का 2022 तक किसान की आय दोगुनी करना व 10 : की कृषि वृद्धि दर हासिल करना न तो दिवास्वप्न है और न ही थोथा दावा है। नरेन्द्र मोदीजी ने कई मिथक तोड़े है। किसानों की आय को दोगुना करना अपवाद नहीं है बल्कि राज्यों की सरकारों को केन्द्र का हमकदम बनकर किसानों को सुविधाओं का लाभ दिलाना है। देश में सिंचाई का रकवा 47 : जो सिमट गया है उसे   90 : लाने का मोदी जी का सपना को सार्थक व पूरक बनाने में सहयोग करना है। म.प्र. की बात की जाये तो आजादी के बाद से 2003 तक सिंचाई का रकबा मात्र 7 लाख हे. पर सिमट गया था, जिसे शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 10 वर्षो में 35 लाख हे. तक पहुँचा कर एक कीर्तिमान स्थापित किया है । प्रदेश में हर गाँव में प्रचुर उत्पादन किसानों की मेहनत और सरकार की मदद की गवाही देता है।

यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि नरेन्द्र मोदी सरकार की प्राथमिकता गाँव, गरीब और किसान है। सारी विकास योजनाएँ गाँव, गरीब और किसान के इर्द-गिर्द ही घूमती हैं। केन्द्र सरकार ने ई-ट्रेडिंग शुरु कर देश की 500 से अधिक कृषि उपज मंडियों को जोड़ दिया है जिससे कि किसानों को अपना उत्पाद देश की किसी भी मंडी में बेचने की ऑनलाइन सुविधा प्राप्त हो गई है। इस समय संपूर्ण देश एक विपणन केन्द्र बन गया है। इससे म.प्र. का आलू, टमाटर, पपीता, संतरा, सरबती गेहूँ , बासमती चावल और अन्य उत्पाद दूरदराज प्रदेशों में बेचे जाने से किसानों क जेब में पैसा आयेगा। किसान की आमदनी में बरकत आयेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कृषि के अर्थशास्त्र को समझकर  खेती की आय को दोगुना करने के लिए एक सूत्र दिया है – ंकाश्त जमीन को तीन भागों में विभाजित कर एक तिहाई पर फसल का विपुल मात्रा में उत्पादन लिया जाए । दूसरे भाग पर कृषि उद्यान, मधुमक्खी पालन, इमारती लकड़ी लगाकर पूरक आय अर्जित की जाये। तीसरे भाग में पशुपालन, मुर्गीपालन, मत्स्यपालन की व्यवस्था की जाये। जब कृषि और कृषक तीन स्तंभो  पर आधारित होगा, परस्पर सहयोग और समन्वय से बरकत होगी।

सरकार ने कृषि लागत को घटाने, जैविक खेती को प्रोत्साहन देने और साख व्यवस्था में सस्ता ब्याज प्रमाणित बीज, नीम कोटेड यूरिया जैसी व्यवस्था की है। पूर्व में खरीफ और रबी के मौसम में यूरिया की कालाबाजारी होती रहती थी। नरेन्द्र मोदी सरकार ने आते साथ ही इसे समझा और इस कालाबाजारी को समाप्त कर व्यवस्था को दुरुस्त किया। अब यूरिया का प्रचुर भंडार राज्यों में पहुँच रहा है। और खाद कारखाने खाद उठाने वालों को निमंत्रण दे रहे है।

अब किसानों को बस सरकार के साथ चलना है योजनाओं का लाभ लेना है अब यदि मौसम खराब होने पर किसान को नुकसान होता है फसल का, तो केन्द्र सरकार ने फसल बीमा योजना को भी सरल कर दिया है और प्रत्येक किसान को कम प्रीमियम दर पर अधिक लाभ मिलने का रास्ता खोल दिया है । रबी, खरीफ फसलों पर एवं अब उद्यानिकी फसलों पर भी फसल बीमा का लाभ किसानों को मिलेगा। पहली बार जल भराव, चक्रवात, बेमौसम बारिश, स्थानीय आपदा, ओला, जमीन धँसना आदि से होने वाले नुकसान को भी शामिल किया गया है।

अब निश्चित रुप से किसानों की आय दो गुनी होगी और हर घर खेत खलिहान में सुख समृद्धि दस्तक देगी। सब्र का फल मीठा होता है। खेती लाभ का व्यवसाय बनेगी। केन्द्र में नरेन्द्र मोदी जैसा नेतृत्व एवं प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान जैसा नेतृत्व है। अब देश और प्रदेश निश्चित रुप से विश्व में अपना परचम लहरायेगा और स्वर्णिम म.प्र. की और स्वर्णिम देश का सपना सच साबित होगा।

सक्षम किसान, समृद्ध भारत और समृद्ध मध्यप्रदेश।

[लेखक@दीपक पचौरी,जबलपुर(म.प्र.)]

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