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“वॉटर वुमन शिप्रा” को जल संरक्षण कार्यों के लिए मिला सम्मान।

स्टार भास्कर डेस्क@ हर वर्ष न्यूज़ एसोसिएशन ऑफ इण्डिया इस इवेंट का आयोजन करती है। जिसमें वो अपने पत्रकारों के अलावा भी कुछ भिन्न क्षेत्रों के उन विशिष्ट लोगों को भी सम्मान देती है जिनका सहयोग भारत के लिए अनुकरणीय रहा है। इस मंच पर शिप्रा को अपने जल संरक्षण के लिए सम्मान दिया गया।
शिप्रा ने माँ नर्मदा की ३६०० किलो मीटर की पैदल परिक्रमा १०८ दिन में पूर्ण की।इस परिक्रमा के दौरान उन्होंने जल के प्रति गाँव गाँव एक अलख जगायी।इसके अलावा शिप्रा कई घाटों पर सफ़ाई अभियान चला रही है।
शिप्रा ग्लोजल फ़ाउंडेशन की चेयरपर्सन है।वो कई सालो से जल की सुरक्षा के लिए कार्यरत है।इसके पहले भी मध्य प्रदेश और उतराखंड सरकार शिप्रा को उनके कार्यों के लिए सम्मानित कर चुकी है।शिप्रा को इस साल सिंधु महोत्सव से भी आमंत्रण आया था।


जल तत्व ये शब्द अब शास्त्रों तक सीमित होकर रह गया है।इसका महत्व आज की पीढ़ी तक आते आते कहीं लुप्त हो गया है।
लेकिन इसी पीढ़ी में कुछ ऐसे भी उदाहरण है जो संज्ञान में भले देर से आ पाए पर अपने जीवन की निधि वो पंचतत्व को मान बैठे है।
शिप्रा पाठक जो उत्तर प्रदेश के दातागंज की निवासी है।वो जल की हर बूँद को बचाने के लिए भारत में विचरण कर रही है।जिस कोरोना काल में हम सब दबे सहमे से अपने घर से सिर्फ़ ज़रूरत को निकल रहे है,ऐसे में एक स्त्री जल संरक्षण के लिए घर से निकल जाए तो अलग सी बात तो लगती ही है।हैरत इस बात पर भी है कि वो सन्यासी भी नही है और एक अच्छे ख़ासे बिज़नेस में उनकी देश विदेश तक भागीदारी भी है। आयुर्वेद को बढ़ावा देने वाली शिप्रा अपने स्वयं के खेतों में भी लेमन ग्रास,खस,श्यामा तुलसी जैसी पौध को उपजा रही है।
शिप्रा की दादी उत्तर प्रदेश बदायूँ ज़िले के दातागंज क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुकी है अतः शिप्रा राजनीति की छाँव से भी अछूती नही है।लेकिन बिज़नेस और राजनीति को अलग करके शिप्रा ने अपनी नर्मदा परिक्रमा की।घर से दो जोड़ी कपड़े और हाथ में एक दण्ड लेके माँ नर्मदा की ३५०० किलो मीटर की परिक्रमा पर अकेले जंगल में निकल गयी थी।१०८ दिन में वो परिक्रमा पूर्ण करके आयी और उसके बाद नर्मदा खंड के आदिवासियों के लिए काम करना आरंभ कर दिया।जल संरक्षण को अपने जीवन की प्राथमिकता मानते हुए शिप्रा प्रकृति,पर्यावरण,धर्म,संस्कृति के प्रति लोगों को जागरुक कर रही है।
जल संरक्षण पर अपने विचार देते हुए उन्होंने कहा कि मैने कोई बहुत बड़े काम नही किए।हाँ छोटे छोटे प्रयास हर दिन करती हूँ।उन्होंने सबसे पहले जल तत्व से स्वयं को जागरुक किया और अपने आस पास के सभी लोगों को वो जागरुक करती है कि हर बूँद को धन समान ही व्यय करिए।अगर हमने जल को लेके अपने बर्ताव को नही बदला तो कल धन से भी हम जल ख़रीद नही पायेंगे।
अतः अब समय आ गया है कि हम सब जल को बचाने के लिए एक शपथ ले कि अपने अपने हिस्से के जल को बचायेंगे।
जल के प्रति शिप्रा के इसी जुनून के कारण सब उन्हें “वॉटर वुमन की संज्ञा से बुलाते है।

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