Tuesday , June 2 2020
Home / देश / मध्य प्रदेश / जबलपुर / विदेशों से आई मरबर्ग, इबोला, निपाह, सार्स और कोरोना जैसी भयावह महामारी के होस्ट चमगादड़ : डॉ. अर्जुन शुक्ला।

विदेशों से आई मरबर्ग, इबोला, निपाह, सार्स और कोरोना जैसी भयावह महामारी के होस्ट चमगादड़ : डॉ. अर्जुन शुक्ला।

स्टार भास्कर डेस्क/शैलेष दुबे@ जबलपुर: 1930 में पहली बार कोरोनावायरस का चला था पता, मुर्गी में दिखे थे लक्षण, 07 प्रकार के कोरोनावायरस में 03 है गंभीर, अब तक 04 से ज्यादा महामारी फैला चुके वायरस के होस्ट चमगादड़ पर ये इकोसिस्टम के लिए ज़रूरी भी, 2002 में चीन के सार्स महामारी के समय होना था सतर्क, विदेशों से आई है मरबर्ग, इबोला, निपाह और सार्स जैसी भयावह महामारी . शासकीय होम साइंस कालेज जबलपुर में शिक्षण सेवा दे रहे  पर्यावरणविद, नर्मदा रत्न, विज्ञान भूषण सम्मानित डॉ. अर्जुन शुक्ला ने बताया कि कोरोना वायरस विषाणुओं का एक बड़ा समूह है, जो इंसानों में सामान्य जुकाम से लेकर श्वसन तंत्र की गंभीर समस्या तक पैदा कर सकता है। इस वायरस का नाम इसके शेप (क्राउन) के आधार पर रखा गया है। 2002 के सार्स एवं 2012 के मर्स वायरस से भी अलग है। नोवल कोरोनावायरस भी जूनोटिक (जानवरों से इंसानों में) बीमारी है । 31 दिसंबर, 2019 को चीन के डब्ल्यूएचओ कंट्री ऑफिस में न्यूमेनिया के नए और अजीबोगरीब मामले सामने आए । फिर चीन के वुहान शहर में ऐसे मामले बड़ी संख्या में सामने आए । तब पता चला कि ये नए कोरोनावायरस की वजह से हो रहा है जिसका नाम 2019 नोवल कोरोनावायरस (नया वायरस) दिया गया । बाद में 11 फरवरी, 2020 को टैक्सोनोमी ऑफ वायरसेज की इंटरनैशनल कमिटी ने इसका नाम सार्स 2 दिया । अर्जुन ने कई शोध पत्र के परीक्षण के आधार पर बताया कि 1930 में पहली बार कोरोनावायरस का पता चला था । उस समय यह वायरस घरेलू मुर्गियों में मिला था। जानवरों में कोरोनावायरस सांस, आंत, जिगर आदि की समस्या पैदा करता है। सिर्फ सात कोरोनावायरस ऐसे हैं जो इंसान में बीमारी फैलाते हैं । चार कोरोनावायरस की वजह से इंसान में आम सर्दी जुकाम की समस्या होती है। इनके नाम 229 ई, ओसी 43, एनएल 63, और एचयूके 1 हैं । तीन कोरोनावायरस इंसान में फेफड़े का गंभीर संक्रमण पैदा करता है 2002 में सार्स-कोव , 2012 में मार्स और मौजूदा कोविड-19 या सार्स-कोव-2.

विदेशो से आये वायरस जो चमगादडों ने फैलाये
1967 : युगांडा अफ्रीका में मरबर्ग महामारी, संक्रमित 590, मौत 478.
1976 : डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला महामारी, संक्रमित 33687, मौत 14693.
1999 : मलेशिया में निपाह महामारी, संक्रमित 495, मौत 265
2002 : चीन में सार्स वायरस, संक्रमित 8098 मौत 774
2019 : चीन में सार्स- कोरोनावायरस, संक्रमित – 19 लाख, मौत 1 लाख से ऊपर 

वायरस को फलने-फूलने और फैलने के लिए जो खूबियां चाहिए होती हैं, उनमें से ज्यादातर चमगादड़ में पाई जाती हैं। चमगादड़ विषाणुओं का स्रोत होता है पर ये इकोसिस्टम के लिए ज़रूरी भी हैं, कीटभक्षी चमगादड़ बड़ी संख्या में कीड़े-मकोड़े खाते हैं, ये मच्छर और फसलों को नुक़सान पहुंचाने वाले कीट-पतंगों को खाते हैं। वहीं फ्रूट चमगादड़ पेड़ों पर पराग छिड़कने और उसके बीज फैलाने का काम करते हैं। किसी वायरस को ग्रोथ के लिए बहुत बड़ी संख्या में एक साथ रहने, लंबी आयु, उड़ने की अच्छी क्षमता वाले जीव की जरूरत होती है, साथ जीव का क्लोज सोशल इंटरेक्शन हो । वायरस की ग्रोथ के लिए जरूरी है कि उस जीव में उड़ने की अच्छी क्षमता हो ताकि एक बार में लंबी दूरी तय कर पाएं और वायरस को दूर-दूर तक फैलने में सहायता मिल सके । इस हिसाब से चमगादड़ अधिक से अधिक वायरसों के लिए एक अच्छा होस्ट बनता है ।
वर्तमान में चल रही वैश्विक महामारी कोरोना वायरस/सार्स-2 के लिए डॉ. अर्जुन ने कई शोध पत्र के परीक्षण के आधार पर बताया कि मिडिल ईस्ट श्वसन सिंड्रोम (मार्स) कोरोनावायरस की वजह से होने वाला वायरल श्वसन रोग है, जो 2012 में पहली बार सऊदी अरब में पहचाना गया था। कोरोनावायरस के तीन मुख्य उपसमूह हैं: अल्फा, बीटा और गामा । मिडिल ईस्ट श्वसन लक्ष्ण कोरोनावायरस बीटा कोरोनावायरस है । ड्रमडेरी ऊंट मार्स-कोव  के लिए एक प्रमुख भंडार का काम करते हैं और मनुष्यों में संक्रमण के लिए पशु स्रोत है। मर्स के केस में वायरस चमगादड़ से अरेबियन ऊंट में आया और उसे अपना नैचरल रिजरवॉयर होस्ट बना लिया । ऊंट से यह वायरस दुर्घटनावश इंसानों में ट्रांसमिट हो गया । कोरोना वायरस एक सिंगल स्ट्रैंडेड आरएनए वायरस है इसलिए इसमें म्यूटेशन बहुत अधिक होता है। यही कारण है कि कोरोना वायरस नए-नए होस्ट में जल्दी अडप्ट हो जाता है। मर्स वायरस ने जब ऊंट को अपना होस्ट बनाया तो उसे अडप्ट कर लिया और उसमें जीवित रह गया । लेकिन जब जंप करके वह इंसानों में आया तो उन्हें अपने होस्ट के रूप में अडप्ट नहीं कर पाया और खत्म हो गया । कोविड-19 के मामले में अब तक हुईं अलग-अलग रिसर्च के आधार पर यह सामने आ रहा है कि नॉर्मल कोरोना वायरस की तुलना में सार्स कोरोना-2 में म्यूटेशन कम पाया गया है । यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह वायरस इंसानों में अडप्ट हो चुका है। यानी यह इंसान को अपने होस्ट के रूप में अपना चुका है । जिस वायरस का जिनोम बड़ा होता है, उसमें किसी दूसरे वायरस के साथ रीकॉम्बिनेशन बनाने और म्यूटेशन के बाद नया वायरस बनने की संभावना अधिक होती है। सार्स कोरोना वायरस-2 को उसका बड़ा जिनोम यह खूबी देता है। जब एक नया होस्ट तलाशने के लिए वायरस किसी व्यक्ति या जीव में जंप करता है तो यह बात विशेष महत्व रखती है कि उस होस्ट के बॉडी सेल के ऊपर बने रिसेप्टर्स के साथ इस वायरस की सतह पर लगे प्रोटीन कितनी अच्छी तरह बाइंड हो पाएंगे । अगर यहा बाइंडिंग अच्छी हो जाती है तो इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि वायरस इस जीव को अपना होस्ट बना लेगा । सार्स और सार्स कोरोना-2 की अगर तुलना करें तो रिसर्च में यह बात सामने आई है कि सार्स की तुलना में सार्स कोरोना-2 की बाइंडिंग कैपेसिटी ह्यूम्स के अंदर 10 से 20 गुना अधिक है ।

मध्य प्रदेश की ताजा खबरें- यहां क्लिक करें

About admin-star

Check Also

गर्मी में पशु-पक्षियों के लिए भी करें दाना-पानी की व्यवस्था

स्टर भास्कर डेस्क@ गर्मी में पानी को अमृत के समान माना जाता है, मनुष्य को …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *