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कैसे होती है: गूगल, फेसबुक, व्हाट्सऐप और अन्य ऐप की कमाई?

गैजेट्स गुरू डेस्क: आजकल हर कोई सोशल मीडिया पर एक्टिव है। इनमें आप और हम भी शामिल हैं। रोज नए-नए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी सामने आ रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा लोग फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर एक्टिव हैं। वैसे स्नैपचैट, रेडइट, वीचैट के भी यूजर्स की संख्या ठीक-ठाक है लेकिन फेसबुक के मुकाबले कम ही है।

वैसे अगर आपसे यह सवाल किया जाए कि क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर फ्री में सेवा देने वाले, गूगल, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया ऐप की कमाई कैसे होती है या फिर फ्री में तमाम तरह के ऐप रोज गूगल प्ले-स्टोर पर आ रहे हैं उनकी कमाई कैसे होती है?

तो अगर यह सवाल आपके दिमाग में कभी आया है या नहीं भी आया हो तो इस सवाल का जवाब आपको हम देंगे कि आखिर फ्री में इंटनरेट पर एक क्लिक करते ही तमाम जानकारी देने वाले इन वेबसाइट्स, ऐप और सोशल मीडिया कंपनियों की कमाई कैसे होती है और कितनी होती है।

व्हाट्सऐप से कैसे होती है फेसबुक की कमाई?
सबसे पहले व्हाट्सऐप की बात करें तो इस समय पूरी दुनिया में व्हाट्सऐप को 1 अरब से ज्यादा लोग यूज करते हैं। व्हाट्सऐप फिलहाल फेसबुक के देखरेख में है। साल 2014 में फेसबुक ने व्हाट्सऐप को 19 अरब डॉलर में खरीद लिया था। अब बात करें कमाई की तो सोशल मीडिया या इंटरनेट की दुनिया भी विज्ञापन पर चल रही है लेकिन हमें पता नहीं चल पाता है।

दरअसल ऑनलाइन मार्केट में जिस विज्ञापन का इस्तेमाल होता है तो माइक्रो एडवरटाइजिंग या सूक्ष्म विज्ञापन कहते हैं। इस माइक्रो एडवरटाइजिंग के जरिए फेसबुक और व्हाट्सऐप आपको बारे में आपसे ज्यादा जानते हैं। आप जिन बातों को भूल चुके हैं, उन बातों का रिकॉर्ड भी फेसबुक के पास है। इसके एक उदाहरण से समझते हैं। कई बार फेसबुक आपको दो साल पहले शेयर किए गए पोस्ट को दिखाता है।

अब व्हाट्सऐप फेसबुक के कब्जे में है ऐसे में फेसबुक व्हाट्सऐप यूजर्स की प्रत्येक गतिविधि पर नजर रख सकता है। इसके अलावा आपको फोन में जितने नंबर सेव है उसे भी व्हाट्सऐप देख रहा है। अगर आपने गौर किया हो तो आपको बता दें कि कई बार हम अपने फोन या कंप्यूटर पर किसी प्रोडक्ट के बारे में सर्च करते हैं और फिर उसे छोड़ देते हैं या फिर उसका लिंक अपने किसी दोस्त के साथ शेयर करते हैं। इसके कुछ दिन बाद आपको उसी प्रोडक्ट के विज्ञापन हर जगह नजर आने लगते हैं। चाहे वह इंस्टाग्राम हो, फेसबुक हो या फिर आप किसी वेबसाइट पर लॉगिन कर रहे हों।

दरअसल आपकी इन गतिविधियों से फेसबुक को यह पता चल जाता है कि आपको किन चीजों की जरूरत है और आपको कौन-कौन सी और किस प्रकार की चीजें पसंद हैं? इसी आधार पर कंपनी आपको विज्ञापन दिखाती है जिसे टारगेट एडवरटाइजमेंट करते हैं, क्योंकि इस प्रक्रिया में आपको सिर्फ उन्हीं चीजों का विज्ञापन दिखाया जाएगा जिनके बारे में आपने कभी सर्च किया है या फिर उनमें आपकी रूचि है। आपकी रूचि या पसंद का पता फेसबुक को आपकी फेसबुक प्रोफाइल, आपके द्वारा लाइक्स किए गए पोस्ट, व्हाट्सऐप पर शेयर किए गए लिंक के आधार पर पता चलती है। हालांकि व्हाट्सऐप कहता है कि वह आपका डाटा फेसबुक के साथ शेयर नहीं करता है। फेसबुक हर भारतीय यूजर्स से एक दिन में करीब 35 रुपये कमाता है।

फ्री में सर्विस देकर भी सेकेंड में कमाता है 9,30,900
एक रिपोर्ट के मुताबिक गूगल एक सेकेंड में करीब 9 लाख 30 लाख 900 रुपये कमाता है। हालांकि यह आंकाड़ा काफी पुराना है। खैर कमाई के तरीके बात करें तो फेसबुक की तरह गूगल भी आपके द्वारा दी जानकारी के आधार पर ही अपनी कमाई करता है। वैसे तो जब आप किसी प्रोडक्ट के बारे में गूगल पर सर्च करते हैं तो पहला रिजल्ट उस प्रोडक्ट का विज्ञापन ही होता है। इसके अलावा किसी अन्य जानकारी के बारे में सर्च करने भी विज्ञापन देखने को मिलते हैं और इन्हीं विज्ञापनों के आधार पर गूगल विज्ञापन देने वाली कंपनियों से पैसे लेता है।

जीमेल से भी होती है गूगल की कमाई
कई बारे आपने जीमेल इनबॉक्स चेक किया होगा और आपको डॉक्टर बत्रा का ईमेल मिला होगा। अब आप सोचिए कि आपने डॉक्टर बत्रा को ईमेल किया नहीं है फिर आपकी ईमेल आईडी उनके पास कैसे पहुंची। यह सब माइक्रो एडवरटाइजिंग ही है। वहीं कई बार आपको अनजान नंबर से कॉल भी आते हैं तो और आपसे पूछा जाता है कि सर आपको हमारी सर्विस चाहिए, जबकि आपने किसी कंपनी को ना कॉल किया है और ना ही मैसेज किया है। दरअसल गूगल के पास आपका फोन नंबर भी है और यहीं से आपकी पर्सनल जानकारी मार्केट में पहुंचती है और उसका इस्तेमाल विज्ञापन के लिए किया जाता है।

आपके मोबाइल से भी कमाता है गूगल
आज पूरी दुनिया में आईओएस से ज्यादा एंड्रॉयड यूजर्स की संख्या है और एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम गूगल का ही है। अब आपके फोन में ही गूगल का ऑपरेटिंग सिस्टम है। ऐसे में आपको फोन में कब क्या हो रहा है। इसके बारे में गूगल को सबकुछ पता है और इन सभी जानकारियों को इस्तेमाल गूगल आसानी से विज्ञापन के लिए कर सकता है।

गूगल प्ले-स्टोर पर फ्री में मिलने वाले ऐप भी कमाते हैं
गूगल प्ले-स्टोर से आप सभी ऐप फ्री में ही डाउनलोड करते हैं। ऐसे में इन ऐप की कई सारी शर्तें भी होती हैं जिन्हें बिना पढ़े और समझे आप और हम ओके कर देते हैं। उसके बाद ही ऐप आपके फोन में इंस्टॉल होता है और काम करता है। ऐसे में जब आपने खुद ही कॉल रिकॉर्ड करने, मैसेज पढ़ने, कॉल करने का परमिशन दे दिया है तो फिर कुछ कहने के लिए बचा ही नहीं है। इसके बाद हर रोज आपके पास फालतू के ईमेल, मैसेज और कॉल आते हैं और इनसे ही होती है इन कंपनियों और ऐप की कमाई।

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