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कसमे सुशासन बाली,और कर्म कुशासन बाले..

नरसिंहपुर|29 दिसम्बर 2017

“सुशासन”इस शब्द के मायने अपने ही आप मे बेहद ही सुखद एवं प्रभावशील हैं,सुशासन का मतलब अच्छा शासन ऐंसा शासन जहाँ पारदर्शिता का आभाव न हो भृष्टाचार न हो जनता की समस्याओं को सुनना एवं उनका निराकरण करना नेताओं और अधिकारियों के लिए सर्वोपरि हो शासन शब्द में सु जोड़ देने से इसका अर्थ अत्यंत ही मंगलकारी,शुभ और अच्छा हो जाता है, आजकल जिले के आला अधिकारी सुशासन की कसमे खाते फिर रहे हैं और टूटे फूटे भृष्टाचार युक्त शासन को सुशासन के रूप में परिभाषित किया जाना जबरन जनता पर इसे थोपा जाना सा प्रतीत होता है,कुछ ऐंसा नरसिंहपुर जिले में चल रहा है जिसे कम से कम सुशासन तो नही कहा जा सकता।

      खुलेआम छोटे छोटे गली कूचों समेत एनएच के ढाबों पर शराब की बिक्री जारी है,जिले के युवा शाम होते ही देवदास का रूप धारण कर लेते हैं नतीजा लड़ाई झगड़ा, दुर्घटनाये और सबसे दुःखद बात यह कि देश की रीढ़ की हड्डी कहे जाने बाले युवा शराब,गाँजा इत्यादि नशों की लत में अपना जीवन बर्बाद करते नजर आ रहे हैं।वहीं दूसरी ओर खुलेआम संचालित जुअफड़ों, और सट्टा फड़ो के चलते एक बड़ा समुदाय इस भँवर जाल में फंसता जा रहा है।

       जिले के हालात तो वर्तमान में रावणराज्य की तरह होते जा रहे हैं,बीते दिनों से जारी आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आंदोलन में अधिकारियों ने बेशर्मी और अमानवीयता की सारी हदें पार कर दीं, कई महीनों से वेतन न मिलने के चलते व्यथित एक महिला इतनी बेबस हो गई कि वह बीमारी में अपना इलाज भी नही करा पाई और उसकी मौत हो गई और यह देखिए सुशासन की जब इस विषय पर महिला बाल विकास अधिकारी से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होने कहा कि ऑफिस टाईम में बात करें,अब कुछ भी हो इसे सुशासन तो नही कहा जा सकता।

       एनटीपीसी में कार्यरत मजदूर और छले गए किसान जब अपना हक माँगने खड़े हुए तो उनकी आवाज कुचलने का भरसक प्रयास किया गया,और छेत्र में धारा 144 लगा दी गई, अब साहब जिस शासन में किसानों और मजदूरों की आवाज कुचल दी जाए और उनकी सुध लेने बाला कोई न हो तो इसे कैंसे सुशासन की श्रेणी में रखा जा सकता है,जहाँ सच लिखने बाले पत्रकारों पर तलवार लटका दी जाती है,जहाँ एक दिव्यांग खिलाड़ी महीनों अपने हक के लिए एड़ियाँ रगड़ता है और उसे धुत्कारकर भगा दिया जाता है,जहाँ अन्नदाताओं का रक्त भी कुत्तों से चटवा दिया जाता है,यह कैसा सुशासन है,इतना ही नही इस जिले में तो गरीब मजदूरों से भी बगैर चढ़ोत्तरी लिए न ही पुलिस सुनती है और न ही कोई बाबू तो साहब कहाँ है सुशासन..?

      असल मे सुशासन की कसमे खाना और उसे अमल में लाना दोनों चाँद और सूरज की तरह हैं, जिनकी आत्मा में ही भृष्टाचार भरा हो वह तो समाज को अंधकार ही दे सकते हैं सुशासन नही तो साहब जैंसे शासन प्रशासन चल रहा है चलाइये,लेकिन कम से कम सुशासन का नाम देकर लोगों के जले पर नमक छिड़कने का कार्य तो न कीजिये।

(ललित श्रीवास्तव-WFWJ)

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